हिंदुस्तानी कपड़े त्याग सकते हैं, परंपराएं नहीं
सेलम में रहने वाली तीन बच्चों की मां, एक पेशेवर सेक्स वर्कर, काम के दौरान मंगलसूत्र पहने दिखती है. कोट्टयम (केरल) के लोग मसाज के लिए रिफाइंड नारियल तेल पसंद करते हैं. मिजो समाज में प्रणय निवेदन का एक रिवाज है जिसे ‘इन रिम’ कहते
हैं. इसमें विवाह का इच्छुक लड़का किसी लड़की से मिलने उसके घर जा सकता है
और बड़े-बुजुर्गों की निगरानी में उसके साथ कुछ समय बिता सकता है. अब
आइजॉल के लड़के-लड़कियां बिना अभिभावकों की निगरानी में मिलते हैं.
उपरोक्त
पंक्तियां उसी समाज की सच्चाई हैं जिसे हम परंपराओं का पक्का और शारीरिक
संबंधों के मामले में गंभीर देश मानते हैं. भारत एक ऐसे समाज के तौर पर
अपनी पहचान स्थापित किए हुए है जहां के लोग बेहद शालीन और मान्यताओं के
विषय में संजीदा हैं. लेकिन क्या बदलते समय के साथ भी हमारी यह सभी
विशेषताएं प्रासंगिक हैं या फिर अन्य सभी विशेषताओं की तरह यह भी इतिहास के
पन्नों में कहीं खो गई हैं?
नीचे हम
आपको कुछ ऐसे तथ्यों से अवगत करवाने जा रहे हैं जिन्हें पढ़ने के बाद आपको
यही लगेगा कि परंपराओं को गले से लगाने वाले भारतीयों के लिए आज वही
परंपराएं एक ऐसी फांस बन गई हैं जिससे वे छुटकारा तो नहीं पा सकते लेकिन
अपनी निजी प्राथमिकताओं और स्वार्थ के लिए उन्हें दरकिनार जरूर कर देते
हैं.
कहने को
तो देश के बड़े-बड़े राज्य और महानगरों में रहने वाले लोग बहुत मॉडर्न होते
हैं और इसी वजह से वह अपनी मान्यताओं से दूर होते जा रहे हैं लेकिन देश के
छोटे राज्यों यहां तक कि गांवों के लोगों पर हुआ एक सेक्स सर्वे यह बात
प्रमाणित कर देगा कि अब छोटे शहर के लोग भी उतने भोलेभाले नहीं रहे जितना
कभी हुआ करते थे.
इंडिया
टुडे और नील्सन द्वारा हुए इस सेक्स सर्वे में चार महानगरों और 12 छोटे
शहरों के 5,246 पुरुषों और महिलाओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. 63
फीसदी के साथ कोटा (राजस्थान) गुदा मैथुन (एनल सेक्स) करने वाले लोगों से
भरा हुआ है, वहीं जामनगर (गुजरात) ब्लाइंड डेट पर जाने वाले और साथ ही ओरल
सेक्स आजमाने जैसी श्रेणी में शीर्ष पर है. वहीं मध्य प्रदेश का
छोटा का शहर रतलाम थ्रीसम के मामले में सबसे आगे है. कोट्टायम के लोग ताकत
बढ़ाने जैसी दवाओं को खाने में अव्वल हैं तो वहीं आसनसोल के भी 10 प्रतिशत
लोग यह मानते हैं कि पति-पत्नी की अदला-बदली करना उन्हें स्वीकार्य है.
इस अध्ययन
ने हमारी उस मानसिकता को पूरी तरह हिला कर रख दिया है जिसके अनुसार छोटे
शहरों के लोग शारीरिक संबंधों के मामले में ज्यादा विस्तृत होकर नहीं सोचते
बल्कि आधुनिकता और सुविधाओं के निकट होने के कारण बड़े शहर के लोगों में
शारीरिक संबंधों के प्रति जिज्ञासा अधिक होती है.
हम भले ही
अपनी परंपराओं का बोझ अपने सिर पर ढोए आगे बढ़ते जा रहे हैं लेकिन एक
हकीकत यह भी है कि शायद अब किसी से यह बात छिपी नहीं रही है कि अब बदलते
समय के साथ-साथ भारत के लोग भी सेक्स जैसे विषय को लेकर थोड़ा खुलकर सोचने
लगे हैं.
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