पूरा देश शोक मना रहा है, पर शायद दीदी दुखी नहीं हैं
दिल्ली गैंग रेप से जहां पूरा देश शोक मना रहा था वहीं कुछ ऐसे भी मंजर देखने को मिले जो शायद थोड़े अप्रिय थे. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि वो इस नए साल पर कोई खुशी नहीं मनाएंगे क्योंकि दामिनी के साथ जो हुआ उससे वो बहुत दुखी हैं. इसी बीच पश्चिम बंगाल की सत्ता पक्ष की पार्टी टीएमसी अपनी वर्षगांठ मनाने में व्यस्त दिखी. जिस प्रकार का उत्साह और हर्ष टीएमसी के कार्यकर्ताओं में देखने को मिला उससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने बड़े कांड के बाद भी उनको कोई दुख नहीं है. वैसे भी सियासतदारों को कभी भी जनता के दुख में दुखी होते नहीं देखा गया है भले ही वो अपनी छवि बनाए रखने के लिए ऊपर से दुखी जरूर दिखें.
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आगे बहुत कुछ हुआ: बात यहीं तक रुक जाती तो फिर भी ठीक था पर जश्न का मूड बना चुके कार्यकर्ता थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे. आखिर कोई क्यों रुके, क्यों कोई मातम मनाए! आज के भारत में अगर इतनी संवेदना बची रहती तो क्या यहां इतने घिनौने अपराध होते जो पूर्ण रूप से अमानवीय हैं. छोटे-छोटे कपड़ों में थिरक रही लड़कियों के ऊपर नोट बरसाते कार्यकर्ताओं को शायद यह भी याद नहीं होगा कि देश किस परिस्थिति से गुजर रहा है. आज दिल्ली में बलात्कार हुआ है तो उसके विरोध में न जाने कितने लोग खड़े हो गए यही अगर देश के किसी और भाग में हुआ होता तो पता नहीं कितने लोग अपना काम-धाम छोड़ कर प्रतिवाद करने बाहर निकलते और शायद एक कारण यह भी हो सकता है जिससे अपराध पर लगाम नहीं लग पा रही है.
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सबसे अजीब बात यह हुई:
इस पूरे उत्सव में सबसे अजीब बात यह हुई कि यह सारा नाच-गाना पुलिस स्टेशन
के सामने हो रहा था. भले ही पुलिस ने आधी रात के बाद इस पार्टी पर रोक लगा
दी पर जितना भी देर ऐसा हुआ क्या वो समाजिक तौर पर सही था? जहां खुल कर इन
सारी चीजों पर विरोध हो रहा हो वहीं दूसरी तरफ इस प्रकार के विलास का
आयोजन करना कितना सही है? जिस तरह से लड़कियों के ऊपर नोटों की बारिश हो
रही थी उसे देख कर समाज के दोनों रूपों का पता चल रहा था कि किस तरह पुरुष
वर्ग नारियों का उपभोग करते हैं और दूसरा रूप ये था कि किन परिस्थितियों
में महिलाएं इस प्रकार के साधन बन कर उनके सामने प्रस्तुत होती हैं. इन
दोनों रूपों पर सोचना जरूरी है कि आखिर किन कारणों से इस प्रकार की
परिस्थिति का निर्माण होता है जो सामाजिक स्तर पर नैतिकता के साथ निहायत ही
गंदा मजाक है.
हम ऐसे नहीं हैं: इस पूरे घटना को चैनलों पर दिखाए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की तरफ से यह बयान आने लगे. इस घटना पर काफी सारे बवाल खड़े हो चुके हैं. महिला आयोग और विपक्ष ने इस घटना पर शर्मिन्दगी जाहिर की है. इस पर राष्ट्रीय माहिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह की घटना का होना बहुत ही शर्म की बात है और जब तक इस प्रकार की मानसिकता को नहीं बदला जाएगा देश में बलात्कार और नारी उत्पीड़न की घटनाओं में कमी नहीं आएगी. इस प्रकार की राजनीति समाज पर आघात करती है और यहां अगर ऐसी ही राजनीति होती रही तो युवाओं का भविष्य पूरी तरह अंधकार में चला जाएगा.
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