Monday, 18 February 2013

आखिर क्यों नहीं पसीजता समाज का दिल ?

हाल ही में दिल्ली में हुए वीभत्स और खौफनाक गैंग रेप की घटना ने भले ही देश के युवाओं के साथ-साथ अन्य सभी वर्गों के लोगों को महिलाओं के विरुद्ध दिनोंदिन बढ़ते अपराधों के के लिए जागरुक किया हो लेकिन आपको शायद यह नहीं पता होगा कि दिल्ली की दामिनी से पहले ही सीकर (जयपुर) में एक ऐसी ही घटना को अंजाम दिया गया था जिसमें कुछ हैवानों ने 11 वर्ष की मासूम बच्ची को अगवा कर वहशीपन को अंजाम दिया.

बीते साल 20 अगस्त को घटी इस घटना को मीडिया हाइप ना मिल पाने के कारण उस मासूम बच्ची के दर्द को किसी ने भी नहीं समझा जिसके साथ इंसानियत की सभी हदें पार कर गैंग रेप किया गया. 11 वर्ष की इस मासूम को सीकर के ही बस स्टैंड से अगवा किया. उसके साथ गैंग रेप करने के बाद उन हैवानों ने उस बहुत मारा-पीटा और उसके गुप्तांगों को चोट पहुंचाई.

बच्ची के साथ इस वहशीपन को अंजाम देने के बाद इंसान के रूप में उन भेड़ियों ने उसे शहर के बाहरी हिस्से में फेंक दिया. जख्मी हालत में जब उस मासूम को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया तो वहां उसका चेक-अप करने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि उसका प्राइवेट पार्ट्स पूरी तरह से बेकार हो गया है. 6 बड़ी और 8 छोटी सर्जरी करने के बाद भी उस बच्ची की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है.


उल्लेखनीय है कि 22 अगस्त, 2012 को जब उस बच्ची को जयपुर के अस्पताल पहुंचाया गया तो डॉक्टर भी उसकी हालत देखकर कांप गए थे. डॉक्टरों का कहना था कि बच्ची का अत्याधिक बर्बर तरीके के साथ बलात्कार किया गया है. मांसपेशियों का कोई भी विभाजन उसकी योनि और मलाशय के बीच नहीं छोड़ा गया है.


ऑपरेशन के लिए उसकी बड़ी आंत का एक हिस्सा नए मलाशय को बनाने के लिए और कॉलोस्टॉमी सर्जरी के लिए लेना पड़ा. डॉक्टरों का कहना है कि कॉलोस्टॉमी सर्जरी से शौच इत्यादि का वैकल्पिक रास्ता बनाया गया. सर्जरी टीम में शामिल वरिष्ठ डॉक्टर एल. डी. अग्रवाल का कहना है कि इस बच्ची को बचाने के लिए उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है.


बिहार के दरभंगा की रहने वाली यह लड़की अपने पिता की मौत के पश्चात इस उम्मीद से कि सीकर में रहने वाले उसके रिश्तेदार उसके परिवार को काम दिलवाने में सहायता करेंगे, कुछ समय पहले अपनी मां और बड़े भाई-बहनों के साथ सीकर आ गई थी. लेकिन किसे पता था यहां उसके साथ वह होगा जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए.

इस भयानक हादसे के बाद बच्ची ने किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देना ही बंद कर दिया है. वह ना किसी बात पर खुश होती है और ना ही दुखी. अन्य बच्चों की तरह पहले यह भी इंजेक्शन को देखकर डरती थी लेकिन अब उसे कितने ही इन्जेक्शन क्यों ना लग जाए वह कुछ नहीं कहती. शारीरिक और मानसिक रूप से उसकी स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है जिसका अंदाजा तक नहीं लगाया जा सकता.


बच्ची की ऐसी स्थिति के बावजूद स्थानीय पुलिस का रवैया बेहद शर्मनाक है. परिवार के एक सदस्य का यह स्पष्ट कहना है कि इस घटना को लेकर पुलिस गंभीर नहीं है. पहले तो पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज करने से मना कर दिया था. स्थानीय लोगों ने जब विरोध में मार्च निकाला तब कहीं जाकर पुलिस की नींद टूटी.


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गंभीरता से उस मुद्दे पर बात की तब जाकर प्रशासन ने अपनी कार्यवाही तेज की.


लेकिन फिर भी वह मासूम इंसाफ के इंतजार में है. गैंग रेप के आरोप में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन आइपीसी की मामूली धाराएं लगाने के कारण 2 आरोपियों को जमानत भी मिल गई. पीड़िता के रिश्तेदारों का कहना है कि आरोपी राजनीतिक रूप से काफी मजबूत हैं.


महानगर से संबंधित होने के कारण दिल्ली में हुई गैंगरेप की घटना तो सभी के जहन में घर कर गई लेकिन दिल्ली की दामिनी अकेली ऐसी महिला नहीं थी जो वहशीपन का शिकार हुई. ना जाने कितनी ही मासूम लड़कियां हर रोज दरिंदों की हैवानियत का शिकार हो रही हैं लेकिन उनके दर्द को सुनने वाला कोई नहीं है.


 

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