Monday, 18 February 2013

यौन शिक्षा से ही बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं !!

sex educationदेश में इस समय महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून की मांग उठ रही है. क्या करना चाहिए क्या नहीं ताकि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके इस पर बहस हो रही है. ऐसे में विभिन्न नेताओं और नौकरशाहों द्वारा कुछ ऐसे बयान आते है जिससे समाज एक वर्ग खासा नाराज हो जाता है. महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध के बीच मुंबई पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने कहा है कि स्कूलों में दी जाने वाली सेक्स एजुकेशन से समाज में महिलाओं के प्रति स्थिति और बिगड़ रही है. उन्होंने कहा कि जिन देशों में सिलेबस में सेक्स एजुकेशन शामिल है, वहां महिलाओं के प्रति अपराध ज्यादा हो रहे हैं.


महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक मराठी अखबार की ओर से आयोजित सेमिनार में सत्यपाल सिंह ने कहा कि छात्रों को सेक्‍स एजुकेशन से ज्यादा नैतिक शिक्षा देने की जरूरत है. वह आगे कहते हैं कि सेक्स एजुकेशन को लेकर हमें सोच-समझकर आगे बढ़ने की जरूरत है. सिंह ने अमरीका का उद्धारण दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के सिलेब्स में सेक्स एजुकेशन शामिल है, पर स्टूडेंट्स को सिर्फ सेक्शुअल रिलेशन बनाना सिखाया जा रहा है. यह सेमिनार महिलाओं की सुरक्षा पर आयोजित की गई थी.


सिंह ने यह भी कहा कि ‘एक सर्वे के मुताबिक रेप की घटनाएं धूम्रपान से ज्यादा होती हैं. जिन देशों ने सेक्स एजुकेशन की शिक्षा दी जा रही है, वहां महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं. स्कूलों में बच्चों को नैतिक शिक्षा दिए जाने पर जोर देते हुए पुलिस कमिश्नर ने कहा कि सेक्शुअल ऑफेंस शारीरिक से ज्यादा एक मनोवैज्ञानिक क्रिया है. और यह लोगों की प्रदूषित मानसिकता की वजह से हो रहा है. सिंह ने सिनेमा और टेलिविजन सीरियलों को भी आड़े हाथ लिया. उनका मानना है कि टेलिविजन सीरियलों में आजकल शादी से पहले और विवाहेतर सेक्स खुलेआम दिखाए जा रहे हैं. इसके अलावा मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी आज की पीढ़ी सेक्स की ओर ज्यादा रूचि ले रही है.

मुंबई पुलिस कमिश्नर के इस बयान पर कुछ सामजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है. वैसे बच्चों में सेक्स एजुकेशन दिए जाने को लेकर आज भी समाज कई हिस्सों में विरोध दर्ज कराए जाते है. एक तरफ सेक्स एजुकेशन के समर्थन करने वालों का मानना है कि सेक्स एजुकेशन का उद्देश्य किशोरों में एचआईवी एड्स के प्रति जागरुकता लाना है. वही दूसरी ओर इसके विरोध करने वालों का मानना है कि इस तरह की शिक्षा से बच्चों में सेक्स के प्रति जागरुकता कम और अपराध करने प्रवृति ज्यादा पैदा होगी.


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