महिलाओं
की सुरक्षा को लेकर एक मराठी अखबार की ओर से आयोजित सेमिनार में सत्यपाल
सिंह ने कहा कि छात्रों को सेक्स एजुकेशन से ज्यादा नैतिक शिक्षा देने की
जरूरत है. वह आगे कहते हैं कि सेक्स एजुकेशन को लेकर हमें सोच-समझकर आगे
बढ़ने की जरूरत है. सिंह ने अमरीका का उद्धारण दिया. उन्होंने कहा कि
अमेरिका के सिलेब्स में सेक्स एजुकेशन शामिल है, पर स्टूडेंट्स को सिर्फ
सेक्शुअल रिलेशन बनाना सिखाया जा रहा है. यह सेमिनार महिलाओं की सुरक्षा पर
आयोजित की गई थी.
सिंह ने
यह भी कहा कि ‘एक सर्वे के मुताबिक रेप की घटनाएं धूम्रपान से ज्यादा होती
हैं. जिन देशों ने सेक्स एजुकेशन की शिक्षा दी जा रही है, वहां महिलाओं के
खिलाफ अपराध बढ़े हैं. स्कूलों में बच्चों को नैतिक शिक्षा दिए जाने पर जोर
देते हुए पुलिस कमिश्नर ने कहा कि सेक्शुअल ऑफेंस शारीरिक से ज्यादा एक
मनोवैज्ञानिक क्रिया है. और यह लोगों की प्रदूषित मानसिकता की वजह से हो
रहा है. सिंह ने सिनेमा और टेलिविजन सीरियलों को भी आड़े हाथ लिया. उनका
मानना है कि टेलिविजन सीरियलों में आजकल शादी से पहले और विवाहेतर सेक्स
खुलेआम दिखाए जा रहे हैं. इसके अलावा मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी आज की
पीढ़ी सेक्स की ओर ज्यादा रूचि ले रही है.
मुंबई
पुलिस कमिश्नर के इस बयान पर कुछ सामजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है.
वैसे बच्चों में सेक्स एजुकेशन दिए जाने को लेकर आज भी समाज कई हिस्सों में
विरोध दर्ज कराए जाते है. एक तरफ सेक्स एजुकेशन के समर्थन करने वालों का
मानना है कि सेक्स एजुकेशन का उद्देश्य किशोरों में एचआईवी एड्स के प्रति
जागरुकता लाना है. वही दूसरी ओर इसके विरोध करने वालों का मानना है कि इस
तरह की शिक्षा से बच्चों में सेक्स के प्रति जागरुकता कम और अपराध करने
प्रवृति ज्यादा पैदा होगी.
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