किराए की कोख का पनपता धंधा
विज्ञान
आज भगवान का रूप ले चुका है. पहले तो इसने सिर्फ मारने के साधन बनाए थे
लेकिन अब उसने जन्म देने की कला भी सिखा दी है. विज्ञान ने हमारे जीवन शैली
को एक नई ऊंचाई दी है और ये सही भी है क्योंकि प्रगति और विकास के माध्यम
से स्थापित होने वाली जीवनशैली ही आधुनिकता कहलाती है. आज जो दंपत्ति संतान
के सुख से विहीन हैं उनके लिए सरोगेसी की सुविधा उपलब्ध है. सरोगेसी यानि
वास्तविक मां की जगह एक दूसरी महिला बच्चे को जन्म देने के लिए अपनी कोख
का इस्तेमाल करेगी. सरोगेसी को वह महिलाएं अपनाती हैं, जो बच्चे को जन्म
देने में असमर्थ होती हैं. आज जहां सब बिकता है हमने मां और ममता को भी बेच
दिया कितना आगे निकल गया है मानव? ममता जिस शब्द पर भगवान भी नतमस्तक हो
जाते हैं आज बिकने लगी है. आज भारत जैसे गरीब और विकासशील देश में यह
प्रकिया एक धंधे की भांति हो गयी है.
आखिर क्यों बिकती और खरीदी जाती है कोख
सरोगेसी
की सबसे बड़ी वजह है गरीबी. गरीब महिलाओं की पैसों की चाहत उन्हें इस काम
के लिए राजी करवा देती है. जब पुरुष गरीबी की वजह से अपना खून और किडनी
बेचने को तैयार हो जाता है ताकि उनके घर में चूल्हा जल सके तो ठीक वैसे ही
महिलाएं भी गरीबी के कारण अपनी कोख में दूसरे के बच्चे को पाल लेती हैं.
बांझपन भी सरोगेसी की एक बड़ी वजह मानी जाती है. विश्व की तो बात ही नहीं है
भारत में जितनी भी शादियां होती हैं उसमें से 10 % महिलाएं बांझपन से
ग्रस्त होती हैं.
कौन बनती है सेरोगेट मदर
सेरोगेट
मदर की खोज के लिए पहले डॉक्टर की सलाह ली जाती है. फिर विभिन्न अखबारों
में और आजकल तो इंटरनेट पर भी सरोगेट मां की खोज की जा रही है. उसके बाद
महिला की पूरी मेडिकल जांच की जाती है कि कहीं उसे कोई रोग तो नहीं सरोगेट
मां की. उम्र अमूमन 18 साल से 35 साल के बीच होती है.
एक कोख की कीमत
सरोगेट
मां का सारा खर्च वही लोग उठाते हैं जिन्हें बच्चा चाहिए खराए पर कोकि
भारत में जहां तीन के लिए लाख तक खर्च होता है वहीं दूसरे देशों में कम
से कम 35-40 लाख रुपए तक खर्च आता है. ज्यादा खर्च होने के कारण अब विदेश
से भी लोग भारत की तरफ रुख करने लगे हैं और देखते ही देखते यह कारोबार पूरे
हिंदुस्तान में फैल चुका है खासकर दक्षिण भारत में.
सेरोगेसी
भारत के कुछ खास स्थानों में सबसे ज्यादा फैला है जैसे उड़ीसा, भोपाल, केरल,
तमिलनाडु, मुंबई आदि. एक चीज जो ध्यान देने योग्य है वह है सेरोगेसी ऐसे
राज्यों में ज्यादा देखने को मिलती है जहां पर्यटक ज्यादा आते हैं यानि
भारत विदेशियों के लिए एक ऐसी जगह बन चुका है जहां सेरोगेट मदर्स आसानी से
मिल जाती हैं. और अब तो इसने पर्यटन का रूप ले लिया है. इच्छुक पैरेंट्स को
टूर ऑपरेटर पूरा पैकेज ऑफर करते हैं.
भारत
में सरोगेसी इसलिए भी आसान है क्योंकि यहां अधिक कानून नहीं हैं और जो हैं
उनकी नजर में यह मान्यता प्राप्त है. इसके कुछ नियम निम्न हैं :
1. सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे पर जेनेटिक माता-पिता का हक होगा.
2. बच्चे के जन्म -पिता का ही नाम होना चाहिए मेंप्रमाण पत्र
3. सरोगेसी कांट्रेक्ट में सरोगेट मां के जीवन बीमा का उल्लेख निश्चित रूप से किया जाना चाहिए.
4. यदि सरोगेट बच्चे की डिलीवरी से पहले जेनेटिक माता-पिता की मृत्यु हो जाती है, उनके बीच तलाक हो जाता है या उनमें से कोई भी बच्चे को लेने से मना कर दे, तो बच्चे के लिए आर्थिक सहयोग की व्यवस्था की जाए.
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