Monday, 18 February 2013

गलती करने पर लड़कों के साथ कमरे में बंद कर दिया जाता है

हॉस्टल की छात्राएं जब कभी गलती करती हैं तो उन्हें सजा के तौर पर लड़कों के हॉस्टल भेज दिया जाता है. जांच अधिकारियों को एक पीड़ित छात्रा ने बताया कि सीनियर मैडम गलती करने पर उन्हें लड़कों के हॉस्टल भेज देती थीं, जहां उनके साथ हर गलत काम किया जाता था.

बेहद घिनौनी और दिल को दहला देने वाली यह घटना भारत का दिल कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश की है जहां मूक-बधिर और मानसिक रूप से कमजोर लड़कियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है जो इंसानियत को भी शर्मसार कर हमें यह सोचने को विवश कर दे कि क्या वाकई हम एक ऐसे समाज का हिस्सा हैं जिसमें इंसानियत नाम की कोई चीज ही नहीं बची है.


हाल ही में एक ऐसी घटना प्रकाश में आई है जिसका सीधा संबंध फिर से एक बार महिला उत्पीड़न से है. सिहोर (मध्य प्रदेश) में मानसिक रूप से कमजोर छात्राओं को सजा देने के नाम पर उन्हें लड़कों के हॉस्टल में भेज दिया जाता है जहां उनके साथ अमानवीय तरीके से मारपीट और शारीरिक शोषण किया जाता है.

मध्य प्रदेश के ही एक एनजीओ द्वारा संचालित इस गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियां हर दिन डर के साये में जीने को मजबूर हैं कि ना जाने कब उन्हें सजा दे दी जाए और भेज दिया जाए उन लड़कों के पास जिनके लिए उनका शरीर एक ऐसा खिलौना है जिसके साथ जैसे मर्जी खेला जा सकता है, जैसी मर्जी वैसा व्यवहार किया जा सकता है, मारा जा सकता है, उत्पीड़न किया जा सकता है और ना जाने किस-किस तरीके से उन्हें अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया जा सकता है.

ब्राइट स्टार सोशल सोसायटी नामक इस एनजीओ पर स्टेट कमीशन फॉर चाइल्ड राइट्स ने छापामारी की तो पिछले काफी समय से हॉस्टल के भीतर चल रही इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ. छापेमारे में सभी लड़कियों को मुक्त करवाया गया.

पीड़ित लड़कियों का कहना था कि उन्हें गलत काम करने के लिए मजबूर कर दिया जाता था और बहुत बुरी तरह मारा-पीटा भी जाता था. मामूली गलती के लिए भी लड़कों के हॉस्टल भेज दिया जाता था. हॉस्टल में 48 लड़कियां रहती थीं लेकिन जब छापेमारी की गई तो उनमें से 18 लड़कियां गायब मिलीं और जो बची हुई 30 छात्राएं थीं उन्हें एक छोटे से कमरे में बंद कर रखा गया था, जिसकी वजह से उनकी हालत बहुत खराब थी.

स्टेट कमीशन फॉर चाइल्ड राइट्स को यह शिकायत मिली कि हॉस्टल में रहने वाली असहाय बच्चियों के साथ ऐसे कृत्य किए जाते हैं. संस्था के सचिव ने एक लड़की जिसने छोटी सी गलती की थी, को सजा देने के लिए लड़कों के हॉस्टल ले जाने के बहाने अपने साथ अपने परिवार के साथ सुरक्षित तौर पर रखा और फिर चाइल्ड राइट्स में यह शिकायत दर्ज करवाई थी. चाइल्ड राइट्स की चेयर पर्सन ने जब सभी आरोपों की जांच की तो उन्होंने प्रत्येक आरोप को सही पाया. हालांकि मामले की गंभीरता को समझते हुए चाइल्ड राइट्स संस्था की चेयर पर्सन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और सभी छात्राओं को मेडिकल टेस्ट के लिए भेज दिया है.



लड़कियों के साथ हो रही उत्पीड़न की घटनाओं के विरुद्ध हम भले ही अपनी आवाज कितनी ही बुलंद क्यों ना कर लें लेकिन ऐसी घटनाएं हमें यह सोचने को विवश कर देती हैं कि क्या कभी महिलाएं, जो आधिकारिक तौर पर उतनी ही सम्मान की पात्र हैं जितना कि एक पुरुष है, को कभी सामाजिक रूप से सम्मान मिल पाएगा या नहीं? महिलाएं जिन्हें पुरुषों का पूरक कहकर संबोधित किया जाता है उन्हें पुरुषों के ही समान अहमियत दी जाएगी भी या नहीं?

हम चाहे इस बात को नकार दें लेकिन जब तक महिला की देह को मात्र एक भोग की वस्तु मानकर ही उसके साथ व्यवहार किया जाएगा तब तक तो शायद ऐसा हो पाना असंभव ही है.

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