Saturday, 9 March 2013

सरकार की यह कैसी हड़बड़ी

                                सरकार की यह कैसी हड़बड़ी  



delhi gang rape ordinance16 दिसंबर के रात गैंगरेप के बाद जो आक्रोश लोगों में पैदा हुआ था लगता है सरकार ने उसे गंभीरता से नहीं लिया है. यौन हमलों पर केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए अध्यादेश पर रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दस्तखत कर दिए हैं. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब यह अध्यादेश पूरे देश में तत्काल प्रभाव में आ गया है. लेकिन संसद को छह सप्ताह के भीतर इसे पास करना होगा. संसद का बजट सत्र 21 फरवरी से शुरू हो रहा है. इस अध्यादेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में नृशंस अपराध के लिए मृत्युदंड सहित दंड बढ़ाए जाने के प्रस्ताव हैं. इन अपराधों में दुष्कर्म, तेजाब हमले, और ताकझांक शामिल हैं.







यौन अपराधों पर क्या होगी सजा
दुष्कर्म और हत्या या पीड़िता का मरणासन्न स्थिति (कोमा) में जाने पर न्यूनतम 20 साल का कारावास या जीवनपर्यत जेल अथवा मौत की सजा.
-एसिड हमले पर दस साल तक के कारावास की सजा.
-महिला को निर्वस्त्र करने पर 3 से 7 साल तक का कारावास.
-ताकझांक के अपराध में 3 साल तक का कारावास.
-पीछा करना या छेड़खानी करने पर न्यूनतम 1 वर्ष तक का कारावास.
-हिरासत में दुष्कर्म पर न्यूनतम दस वर्ष और अधिकतम उम्रकैद.
-जानबूझकर छूना या अश्लील हरकत को अलग से अपराध में शामिल किया गया है।
इस अध्यादेश में ‘बलात्कार’ शब्द के स्थान पर ‘यौन हिंसा’ रखने का प्रस्ताव है, ताकि उसके दायरे में महिलाओं के ख़िलाफ सभी तरह के यौन अपराध शामिल हों. 








गौरतलब है कि यह अध्यादेश न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की रिपोर्ट पर आधारित है, और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी थी. सरकार ने जो अध्यादेश तैयार किया था उसमे यौन अपराधों का सामना कर रहे राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने संबंधी वर्मा आयोग की सिफारिश पर भी कुछ नहीं किया गया है. सरकार ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून पर वर्मा समिति की यह सिफारिश भी नामंजूर कर दी थी कि यदि सशस्त्र बल के जवान महिला के खिलाफ अपराध के आरोपी पाए जाते हैं, तो सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून के तहत सुरक्षा नहीं दी जाए.

हालांकि अध्यादेश के प्रभावी होने से पहले कई महिला संगठनों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया था कि वह इस पर हस्ताक्षर न करें, क्योंकि इसमें जस्टिस वर्मा आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया. लोगों ने यौन अपराधों पर यूपीए सरकार द्वारा लाए गए कानून को ‘जनता के साथ धोखा’ करार दिया है. महिला संगठनों का मानमा है कि कई गंभीर मुद्दों पर सरकार को जिस तरह से ध्यान देना चाहिए वहां उन्होंने हड़बड़ी दिखाई.

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